चोर चोरी भी करे और साहूकार जागता भी रहे?
भोपाल।प्रिय मित्र प्यारे मोहन का कहना बिल्कुल खरी बात है। पुलिस बड़े फख्र से कहती है, “अवैध शराब की सूचना दें, सख्त कार्रवाई होगी!” लेकिन पिछला रिकॉर्ड खंगालिए तो पता चलता है कि कार्रवाई सूचना देने वाले पर ही हो जाती है। या फिर गाँव के उस दबंग शराब माफिया को गुप्त खबर मिल जाती है—”अरे भाई, वो फलां गरीब तुम्हारे धंधे की मुखबिरी कर रहा है!” फिर क्या, दबंग मुस्तैद और गरीब पस्त!
यह सरकार का ऐसा तिलस्म है जहाँ:
- एक हाथ से बोतल, दूसरे से पर्चा: एक तरफ राजस्व के नाम पर गली-गली शराब के ठेके खोले जाते हैं, और दूसरी तरफ ‘नशा-मुक्ति’ के भारी-भरकम पोस्टर चिपकाए जाते हैं।
- दोहरा खेल: यह तो वही बात हुई कि चोर को चोरी का न्योता भी दो और साहूकार को जागते रहने की हिदायत भी।
सालों-साल से ये नशा-मुक्ति अभियान चल रहे हैं, लेकिन नतीजा? दुकानें और नशेड़ी—दोनों में बेतहाशा इजाफा!
समाधान क्या है?
अब वक्त आ गया है कि जनता सरकार के इस भ्रमजाल को समझे। जब तक जड़ में दीमक लगी हो, पत्तियों पर पानी छिड़कने से पेड़ नहीं बचता। अगर वाकई कोई बदलाव चाहिए, तो जनता को अब “नशा-मुक्त सरकार अभियान” चलाना पड़ेगा। क्योंकि जब नशा बेचने की सरकारी छूट ही नहीं रहेगी, तो फिर किस बात की ‘मुक्ति’ और कैसा ‘अभियान’?
