टॉक्सिक’ और ‘आवारापन 2’ जैसी बड़ी फिल्मों के सामने चट्टान की तरह डटी ‘हनुमान अंश’! 25वें दिन भी की धमाकेदार कमाई। जानिए सफलता के पीछे का मुख्य कारण।
पिक्चर स्टोरी
योगेश सोनी (संपादक)
नीम करोरी बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों हर किसी की जुबां और सोशल मीडिया पोस्ट पर छाई हुई है। न केवल नीम करोरी बाबा के भक्त, बल्कि सामान्य दर्शक भी इस फिल्म को देखने के बाद अपने विचार साझा करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। बिना किसी भारी-भरकम प्रमोशन और बेहद कम बजट में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान रच रही है।

कमाई के आंकड़े: ‘टॉक्सिक’ और ‘आवारापन 2’ के सामने बनी चट्टान
साउथ सुपरस्टार यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ और इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ जैसी बड़ी फिल्मों के बीच ‘हनुमान अंश’ 25 दिनों के बाद भी सिनेमाघरों में मजबूती से टिकी हुई है।
- धीमी शुरुआत के बाद शानदार कमबैक: शुरुआती दिनों में कमजोर प्रतिक्रिया मिलने के बाद फिल्म ने दो हफ्तों के बाद अचानक रफ्तार पकड़ी और भारत की सबसे मुनाफेदार फिल्मों की सूची में शामिल हो गई।
- 25वें दिन का कलेक्शन: Sacnilk के अनुसार, चौथे सोमवार को फिल्म ने ₹5.15 करोड़ का इंडिया नेट कलेक्शन किया (रविवार की तुलना में 59.6% की गिरावट के बावजूद यह आंकड़े बेहतरीन हैं)।
- कुल कमाई (50 करोड़ क्लब में एंट्री): चौथे सोमवार को 6,587 शोज के साथ फिल्म का भारत में कुल नेट कलेक्शन ₹45.28 करोड़ और ग्रॉस कलेक्शन ₹53.43 करोड़ तक पहुंच गया है।

सफलता का मुख्य कारण: प्रेमानंद महाराज जी का मार्गदर्शन और नियम
फिल्म के निर्माता विशाल शूटिंग शुरू करने से पहले पूज्य प्रेमानंद महाराज जी के पास आशीर्वाद लेने गए थे। महाराज जी ने उन्हें कुछ विशेष नियम पालने का परामर्श दिया:
- लीड एक्टर का आचरण: बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता को जीवनभर पूर्णतः शाकाहारी रहने और आचरण पवित्र रखने का संकल्प लेना होगा।
- सेट का सात्विक माहौल: पूरी शूटिंग के दौरान सेट पर केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन बनता था। शराब, मांसाहार, अपशब्द, लड़ाई या बहस पर पूरी तरह प्रतिबंध था।
- दैनिक प्रार्थना: हर दिन शूटिंग की शुरुआत और समाप्ति हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से होती थी।
ईश्वरीय कृपा और जीवंत अभिनय का संबंध
इतिहास गवाह है कि नई तकनीक के बावजूद आधुनिक धारावाहिक रामानंद सागर की ‘रामायण’ या ‘श्री कृष्णा’ जैसी सफलता का 5% भी हासिल नहीं कर पाए।
एक साक्षात्कार में रामानंद सागर जी ने बताया था कि उन्हें ‘रामायण’ बनाने की प्रेरणा महावतार बाबा से मिली थी। जब भी कोई बाधा आती, ईश्वरीय मदद मिलती थी। उदाहरण के लिए, जब बाल राम और काकभुशुण्डि जी का दृश्य फिल्माना था, तब एक कौए को बालक के साथ सहज रूप से शूट करना असंभव लग रहा था। प्रार्थना करने पर अचानक एक कौआ आया और बाल राम का अभिनय कर रहे बच्चे के साथ खेलने लगा।

निष्कर्ष:कहने का तात्पर्य यह है कि किसी भी आध्यात्मिक कृति में जीवंतता ईश्वर की प्रेरणा और कृपा से ही आती है। ‘हनुमान अंश’ की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे भगवान हनुमान जी की कृपा, नीम करोरी बाबा का आशीर्वाद और सद्गुरु प्रेमानंद जी महाराज का सटीक मार्गदर्शन ही मुख्य कारण बना है।
