सागर। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल में अनेक आईएएस का तबादला और प्रभार में फेरबदल किया हे। सागर कलेक्टर संदीप जीआर का भोपाल और रीवा कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल का सागर तबादला हुआ हे।
प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस तबादले को लेकर काफी हलचल है।
1. “ब्यूरोक्रेसी बनाम पॉलिटिक्स” का नया अध्याय
सागर जिला मध्य प्रदेश की राजनीति का गढ़ है। यहाँ भूपेंद्र सिंह जी, गोविंद सिंह राजपूत जी और गोपाल भार्गव जी जैसे दिग्गजों का प्रभाव है। चर्चा यह है कि रीवा में विधायकों से सीधा लोहा लेने वाली प्रतिभा पाल क्या सागर के इन कद्दावर नेताओं के साथ तालमेल बिठा पाएंगी? राजनीतिक गलियारों में सवाल तैर रहा है कि क्या वह यहाँ भी अपनी “फाइल टू फाइल” चलने वाली सख्त कार्यशैली अपनाएंगी या थोड़ा लचीला रुख रखेंगी।
2. स्मार्ट सिटी और विकास कार्यों में गति की उम्मीद
सागर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को लेकर जनता में अक्सर मिश्रित प्रतिक्रिया रहती है। इंदौर में उनके सफल रिकॉर्ड को देखते हुए एक वर्ग में यह चर्चा है कि शायद अब सागर के विकास कार्यों में ‘इंदौर वाली स्वच्छता और तेजी’ देखने को मिले। लोगों को उम्मीद है कि रुके हुए प्रोजेक्ट्स अब पटरी पर आ सकते हैं।
3. “सख्त प्रशासक” की छवि का खौफ
कलेक्ट्रेट के भीतर और निचले स्तर के अधिकारियों में थोड़ी बेचैनी है। रीवा और इंदौर में उनके द्वारा किए गए ‘औचक निरीक्षण’ (Surprise Inspections) और लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई की कहानियाँ यहाँ पहुँच चुकी हैं। चर्चा है कि अब दफ्तरों में समय की पाबंदी और फाइलों का निपटारा पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो जाएगा।
4. अवैध अतिक्रमण और भू-माफियाओं पर नजर
रीवा में उनके अंतिम दिनों में भू-माफियाओं पर हुई कार्रवाई की चर्चा सागर के रसूखदारों के बीच भी है। सागर में भी तालाब किनारे या सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण एक बड़ा मुद्दा रहा है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि क्या प्रतिभा पाल यहाँ भी कोई बड़ा ‘बुलडोजर अभियान’ या जांच शुरू करेंगी?
5. चुनाव पूर्व की जमावट?
चूँकि अगले कुछ समय में प्रशासनिक कसावट की जरूरत होगी, तो सरकार ने शायद जानबूझकर एक ऐसी अधिकारी को भेजा है जो दबाव में आए बिना काम करना जानती है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “सागर को सुधारने के लिए लेडी सिंघम की एंट्री” के तौर पर भी शेयर कर रहे हैं।
इंदौर स्वच्छता मॉडल: इंदौर नगर निगम आयुक्त के रूप में उन्होंने शहर को लगातार स्वच्छता में नंबर 1 बनाए रखने और एशिया के सबसे बड़े बायो-सीएनजी प्लांट (गोबर-धन प्लांट) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कर्तव्यनिष्ठा: जनवरी 2021 में उन्होंने बच्चे के जन्म के मात्र 11 दिन बाद ही काम पर लौटकर सुर्खियां बटोरी थीं।
प्रशासनिक कसावट: रीवा कलेक्टर के रूप में उन्होंने धान खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को तत्काल नोटिस जारी कर सख्त संदेश दिया।
