
हमारे आसपास भी बहुतेरे लोग परिवार में, समाज में, राजनीति में, खेल में अनेक तरह का मुगालता पाल बैठते हैं गोया की सारी कायनात वो ही संभाले हैं।
एक गांव में क्रोधी और झगड़ालू किस्म की महिला रहती थी। आगे- पीछे कोई नहीं। बस साथी के नाम पर मुर्ग़ा था। आए दिन उसकी गांव के किसी न किसी आदमी से खटपट होती रहती थी। तंग आकर उसने गांव छोड़ने का मन बना लिया। कुछ सज्जन किस्म के ग्रामीणों ने भलमनसाहत में उसके व्यवहार को जानकर भी रोकने की कोशिश की। लेकिन वो नहीं रुकी।
गुस्से में बौखलाते हुए बोली तुम सभी ने मुझे बहुत सताया है। मैं जा रही हूं, कल से तुम्हें पता चल जाएगा कि मेरे जाने से इस गांव पर क्या गुजरेगी? गांववाले भयभीत से हुए पूछा ऐसा क्या होने वाला है? महिला बोली, देखो मैं अपना मुर्गा साथ लिए जा रहीं हूं अब इस गांव में कभी सबेरा नहीं होगा। इसी के बांग देने से तो सूरज उगता था, सबेरा होता था। इतना कह वो मुर्गे को हाथ में ले चल पड़ी। जब वो दूसरे गांव पहुंची तो उसके मुर्गे ने बांग दी और वहां सबेरा हो गया। महिला मन ही मन बहुत खुश हुई कि उस गांव में तो अभी रात ही होगी। यहां तो मेरे मुर्गे की बांग के कारण ही सूरज उगा है।
मुर्गा उस महिला के मन की बात समझ यकायक बोलने लगा कि हम मुर्गों को कोई गलतफहमी नहीं है कि हमारे बोलने से सूरज उगता है। हमारे मालिक जरूर यह मुगालता पाल बैठते हैं कि हमारे बांग देने से सबेरा होता है। दरअसल हम बांग तभी देते हैं जब सूरज उग आता है। यह सुन महिला आहत हो गई। हमारे आसपास भी बहुतेरे लोग परिवार में, समाज में, राजनीति में, खेल में अनेक तरह का मुगालता पाल बैठते हैं गोया की सारी कायनात वो ही संभाले हैं।
सूत्र जीवन में हमें सभी कुछ पालने का अधिकार है। लेकिन किसी चीज को लेकर मुगालता मत पालिए। यह अनेक दुश्वारियों और अनेक बार हास्य की भी वजह बनता है।
शुभ मंगल
