सागर। जिले की ग्राम पंचायत जूना ने सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाने के लिए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। पंचायत ने गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का कड़ा संकल्प लिया है। अब यदि गांव में कोई शराब बेचते या पीकर उत्पाद मचाते पाया गया, तो उसे भारी आर्थिक दंड के साथ सामाजिक बहिष्कार का भी सामना करना पड़ेगा।
कड़े नियम और भारी जुर्माना
ग्रामवासियों की सहमति से पंचायत में पारित किए गए प्रस्ताव के अनुसार दंड की दरें इस प्रकार तय की गई हैं:
- शराब बेचने पर: ₹25,000 का जुर्माना और साथ ही कानूनी कार्यवाही।
- शराब पीकर गाली-गलौज करने पर: ₹5,000 का आर्थिक दंड।
- सामाजिक दंड: नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार भी किया जाएगा।
निगरानी के लिए समिति गठित
ग्राम पंचायत के सरपंच वीरेंद्र पटेल और भगवती मानव कल्याण संगठन के पदाधिकारी अनिल साहू ने बताया कि इन नियमों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति गांव में गतिविधियों पर नजर रखेगी। सरपंच के अनुसार, “हर महीने पंचायत की मीटिंग आयोजित की जाएगी, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक दंड लगाने और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।”
ग्रामीणों ने लिया संकल्प
यह फैसला केवल पंचायत का नहीं, बल्कि पूरे गांव का सामूहिक निर्णय है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रस्ताव रखा था कि गांव की शांति और युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए शराबबंदी अनिवार्य है। इस पहल से न केवल घरेलू हिंसा में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि गांव के आर्थिक और सामाजिक स्तर में भी सुधार होगा।
