एक टीका ही काफी है: फिजूलखर्ची रोकने के लिए विधायक भूपेन्द्र सिंह का ‘मास्टरस्ट्रोक’।
- मप्र खुरई: राजनीति में अक्सर नेताओं का स्वागत भारी-भरकम फूलों की मालाओं, महंगे बुके और चांदी के मुकुटों से करने की परंपरा रही है। लेकिन सागर जिले की खुरई विधानसभा के विधायक और पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने इस दिखावे की संस्कृति को पूरी तरह बदलकर एक नई मिसाल पेश की है। अब उनके कार्यक्रमों में फूलों की खुशबू की जगह जरूरतमंदों के चेहरे की मुस्कान दिखाई देती है।

- बदल गया स्वागत का प्रोटोकॉल
- भूपेन्द्र सिंह ने अपने स्वागत के व्यक्तिगत प्रोटोकॉल में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा है कि स्वागत के लिए केवल भाल पर चंदन, हल्दी या रोरी का टीका ही पर्याप्त है। उन्होंने महंगे गुलदस्तों और गुलाब की पंखुड़ियों पर होने वाले खर्च पर रोक लगा दी है।गुलदस्ता नहीं, शिक्षा और सुरक्षा का उपहारइस नई पहल के तहत, जो राशि पहले मालाओं और मोमेंटो पर खर्च होती थी, अब उससे

- निम्नलिखित सामग्री भेंट की जा रही है:
- स्कूली बच्चों के लिए: कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स और स्कूल बैग।
- जरूरतमंदों के लिए: सर्दियों में स्वेटर और कंबल।

“यह पहल केवल स्वागत का तरीका नहीं, बल्कि सेवा का एक माध्यम है। स्वागत में मिलने वाली यह सामग्री कार्यक्रम स्थल के पास मौजूद जरूरतमंदों में तुरंत वितरित कर दी जाती है।”
‘सनातनी सेंटा’ की अनूठी भूमिका
भूपेन्द्र सिंह इस पूरी प्रक्रिया में एक ‘मध्यस्थ’ की भूमिका निभा रहे हैं। लोग उन्हें उपहार स्वरूप उपयोगी वस्तुएं देते हैं और वे उन वस्तुओं को सही हकदारों तक पहुँचा देते हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके इस स्वरूप को ‘सेंटा क्लॉज का सनातनी संस्करण’ कहा जा रहा है, जो सिर्फ खुशियां बांटने का काम कर रहे हैं।
समाज के लिए एक सार्थक संदेश
दिखावे की राजनीति के दौर में यह कदम अन्य जन-प्रतिनिधियों के लिए भी एक प्रेरणा है। यदि सभी नेता फूलों और हारों के व्यर्थ खर्च को रोककर उसे जनहित में मोड़ दें, तो समाज के बड़े वर्ग का कल्याण हो सकता है।
