बुंदेलखंड के मोनिया नृत्य को मिली राष्ट्रीय पहचान!
बुंदेलखंड की विलुप्त होती सांस्कृतिक धरोहर, मोनिया नृत्य, को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय डॉ. उमेश वैद्य को जाता है। हाल ही में, उनके नेतृत्व में यह शानदार कला संदीपनी स्कूल, रहली में प्रस्तुत की गई, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।
प्रस्तुति की मुख्य झलकियाँ
डॉ. उमेश वैद्य और उनकी टीम ने भगवान श्री कृष्ण के जीवन के मार्मिक और प्रेरणादायक दृश्यों को नृत्य के माध्यम से जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान दर्शाई गई प्रमुख लीलाएँ:
- श्री कृष्ण की बाल लीलाएँ: नटखट कान्हा की मनमोहक झाँकी।
- कालिया मर्दन: बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक।
- गीता उपदेश: भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए अमर ज्ञान का सार।
दिव्यांग कलाकारों का अद्भुत प्रदर्शन
इस प्रस्तुति की सबसे खास और प्रेरणादायक बात यह है कि डॉ. उमेश वैद्य के ‘वसुंधरा लोक कला मंच’ के सभी कलाकार दिव्यांग हैं। अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद, जब ये कलाकार मंच पर उतरते हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, तो दर्शक स्तब्ध रह जाते हैं और उनकी लगन व कौशल की प्रशंसा करने को मजबूर हो जाते हैं। - डॉ. उमेश वैद्य के अथक प्रयासों से, वसुंधरा लोक कला मंच के माध्यम से मोनिया नृत्य ने पूरे देश में अपनी एक अलग और अमिट पहचान बनाई है। यह मंच न केवल एक कला शैली को बचा रहा है, बल्कि दिव्यांग कलाकारों को अपनी प्रतिभा साबित करने का एक सशक्त माध्यम भी दे रहा है।
यह प्रस्तुति कला, संस्कृति और मानवीय जज्बे का एक अद्भुत संगम थी, जिसने बुंदेलखंड के गौरव को बढ़ाया है।

