रहली। नगर में चल रही श्री रामकथा के चौथे दिन कथा व्यास भगवतानंद महाराज ने रामकथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान श्री राम और उनके तीनों भाइयों के विवाह प्रसंग का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया। कथा सुनते हुए श्रोता भक्ति और आनंद में डूब गए।
चारों भाइयों के विवाह संपन्न
कथा व्यास भगवतानंद महाराज ने बताया कि महाराज दशरथ के चारों पुत्रों – श्री राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के विवाह मिथिला के राजा जनक की पुत्रियों – सीता, उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति के साथ बड़े ही धूम-धाम से संपन्न हुए। उन्होंने विवाह के पश्चात राम जी की बारात का प्रसंग सुनाया कि कैसे यह बारात जनकपुरी में महीनों तक ठहरी रही और जनकपुरीवासियों ने किस तरह आत्मीयता से बारातियों की सेवा की। कथा व्यास ने कहा कि यह केवल एक विवाह नहीं था, बल्कि दो महान कुलों और संस्कृतियों का मिलन था।
कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब कथा व्यास ने सीता जी की विदाई का मार्मिक प्रसंग सुनाया। भगवतानंद महाराज ने जब राजा जनक, रानी सुनयना और जनकपुरी की प्रजा के हृदय में उमड़ रहे विरह और करुणा के भावों का चित्रण किया, तो पांडाल में मौजूद सभी श्रोता भावुक हो उठे।
महाराज ने सीता जी और उनकी तीनों बहनों के अयोध्या के लिए विदा होने के क्षणों को जिस भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया, उससे कई श्रोताओं की आंखें भर आईं और पूरा पांडाल भक्तिमय करुणा से भर गया।
इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष देवराज सोनी, पार्षद अमित नायक, राजेंद्र ठाकुर सहित हजारों श्रोता उपस्थित रहे।
#रामकथा:सिया जी की विदाई में भावुक हुई जनकपुरी,सीता-राम की विदाई प्रसंग ने श्रोताओं को रुलाया
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