मप्र।सागर जिले के रहली में चांदपुर रोड पर चल रही राम कथा के चतुर्थ दिवस भगवान राम के जन्मोत्सव पर अयोध्या में महीनों तक उत्सव चले,और भगवान का जन्मोत्सव कैलाश,स्वर्ग में मनाया गया, भगवान के बाल स्वरूप का दर्शन करने भगवान शिवजी काग भाशुंडी जी के साथ मनुष्य रूप रखकर अयोध्या पहुंचे। कथा व्यास भगवतानंद जी महाराज ने बताया कि पहले शिवजी मदारी बनकर पहुंचे,लेकिन भगवान के दर्शन नहीं हो पाए तो फिर ज्योतिषी का रूप बनाकर पहुंचे और सबसे पहले सरयू किनारे पहुंचे और जो भी स्नान करने आता उसका माथा देखकर उसका भविष्य बताने लगे,यह चर्चा महल पहुंची तो महल बुलाया गया,चारों राजकुमार का भविष्य जानने के लिए। महारानी द्वारा बुलाए जाने पर महल पहुंचे और भविष्य बताने के बहने भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन किए।प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए,भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन किया,चारों राजकुमार बड़े हुए तो वशिष्ठ जी के गुरुकुल पड़ने पहुंचे। महाराज जी ने बताया कि जीव आत्मज्ञान पाने के लिए संसार में आता हे,लेकिन संसार की मोह माया में फंसकर असल उद्देश्य भूल जाता हे,संसार के तमाशे में फंसकर रह जाता हे।जब तक जीव आत्मज्ञान प्राप्त नहीं होता वह कर्म बंधन से मुक्त नहीं हो सकता,और बिना कर्मबंधन से मुक्त हुए मोक्ष प्राप्ति संभव नहीं हे।
कथा व्यास महाराज जी ने अनेक धर्म उपदेश देते हुए,संगीतमय भजनों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
तमाशा खुद ना बन जाना तमाशा देखने वालो – भगवतानंद गिरी महाराज
RELATED ARTICLES
