मप्र के सागर में दिन दिन से चल रहे प्रदर्शन के बाद भी पीड़ित पत्रकार के पक्ष में कोई कार्यवाही नहीं हुई।अब धरना प्रदर्शन से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता,ये सब गए गुजरे जमाने की बाते हे या #राजनीतिक दिखावे के लिए एक यूज एंड थ्रो की प्रक्रिया। अब वो गांधी जी वाला जमाना नहीं रहा..?
साथियों प्रदर्शन करना ही हे….तो कलम का सही उपयोग करे। सिर्फ जनता के मुद्दों की खबर लगाए…..जिसके लिए पत्रकार जाने जाते है। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा विज्ञापन नहीं मिलेगा…बस ना… जिनके पास रोजी रोटी के अन्य साधन नहीं हे वह मित्र रोजी रोटी के लिए अन्य रोजगार ढूंढ लो, सिर्फ मीडिया के भरोसे जिंदा ना रहो। फिर देखो कलम का कमाल। पत्रकारों की खोई हुई जवानी और ताकत पुनः प्राप्त करे।
ऐसे प्राप्त होगी पत्रकारिता की खोई हुई जवानी और ताकत
जिसकी लाठी,उसकी भैंस….
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