मप्र/बुंदेलखंड की धरती से एकता और सामाजिक जागरूकता की एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने शासन और प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं। सागर जिले की रहली जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम पटना बुजुर्ग के ग्रामीणों ने शराब के खिलाफ एक मोर्चा खोल दिया है, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
संकल्प की शक्ति: ‘कोई नहीं देगा दुकान के लिए जगह’
पिछले दिनों ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से गांव को नशा मुक्त बनाने के लिए शराबबंदी का संकल्प लिया था। इस संकल्प की पहली बड़ी परीक्षा तब आई जब मार्च माह में आबकारी विभाग द्वारा शराब दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई।
ग्रामीणों ने इस चुनौती का सामना बड़ी एकजुटता से किया:
- सार्वजनिक मुनादी: गांव में बाकायदा ढोल बजाकर मुनादी करवाई गई और सूचना दी गई कि कोई भी ग्रामीण अपने घर या जमीन को शराब दुकान खोलने के लिए किराए पर नहीं देगा।
- एकजुटता का संदेश: ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे गांव की शांति और युवाओं के भविष्य को चंद रुपयों के लालच में बर्बाद नहीं होने देंगे।
चर्चा में है पटना बुजुर्ग का मॉडल
अक्सर देखा जाता है कि शराब दुकानों के टेंडर होते ही लोग मोटा किराया पाने के लालच में दुकानदारों को जगह उपलब्ध करा देते हैं। लेकिन पटना बुजुर्ग ने इस धारणा को तोड़ दिया है। गांव के इस कदम से शराब ठेकेदारों के सामने अब दुकान खोलने के लिए जगह का संकट खड़ा हो गया है।
”यह सिर्फ एक निर्णय नहीं, बल्कि हमारे गांव की मर्यादा और एकता की परीक्षा है। हमने ठान लिया है कि पटना बुजुर्ग को नशा मुक्त बनाएंगे।” — बीड़ी पटेल ग्रामीण
क्या कायम रहेगी यह एकजुटता?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी ग्रामीण अपने इस संकल्प पर अडिग रहेंगे? क्या कोई लालच इस एकजुटता में सेंध लगा पाएगा? फिलहाल, पटना बुजुर्ग की यह पहल आसपास के गांवों के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही है।
